Murgi Zibah Karne Ki Dua | नियत, सही तरीका और पूरी जानकारी 2026

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Shahadat Hussain ✪

Murgi Zibah Karne Ki Dua | नियत, सही तरीका और पूरी जानकारी 2026
☪ इस्लामिक दुआ गाइड 2026

मुर्गी ज़िबह करने की दुआ
सही तरीका और पूरी जानकारी

अगर आप पहली बार मुर्गी हलाल करने जा रहे हैं या दुआ याद करना चाहते हैं — यह गाइड आपके लिए ही लिखी गई है।

अस्सलामु अलैकुम दोस्तों! आज हम एक बहुत ज़रूरी और अहम विषय पर बात करने वाले हैं — मुर्गी ज़िबह करने की दुआ। यह दुआ न सिर्फ मुर्गी बल्कि किसी भी हलाल जानवर को ज़िबह करते वक्त पढ़ी जाती है।

देखो, हमारे देश भारत में ज़्यादातर घरों में मुर्गी या मुर्गा खाया जाता है। बाज़ार में 200 से 350 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकने वाली मुर्गी आज आम खाने का हिस्सा बन चुकी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे हलाल तरीके से काटना कितना ज़रूरी है? अगर आप घर पर मुर्गी काटते हैं या ईद-बकरीद पर जानवर हलाल करते हैं, तो यह दुआ और तरीका आपको ज़रूर याद होना चाहिए।

💡 याद रखो: अल्लाह का नाम लिए बिना ज़िबह किया हुआ जानवर इस्लाम में हराम माना जाता है। इसलिए दुआ जानना और पढ़ना फ़र्ज़ है।

🕌 मुकम्मल दुआ

मुर्गी ज़िबह करने की दुआ

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نِيَّت — नियत
نَوَيْتُ أَنْ أَذْبَحَ هٰذَا الْحَيَوَانَ بِحَيْثُ يُخْرَجُ عَنْهُ الدَّمُ الْمَسْفُوحُ وَتَكُونُ لَحْمُهُ حَلَالًا لِجَمِيعِ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ وَالْمُسْلِمِينَ وَالْمُسْلِمَاتِ
ज़िबह के वक्त — 3 बार
بِسْمِ اللهِ اللهُ أَكْبَرُ  ×3
🔤 Indo-Pak Transliteration
Nawaitu an azbaha haazal haiwana be haisu yukhraju anhud-damul masfoohu wa takoonu lahmahu halaalal li-jamee'il mu'mineena wal mu'minaati wal muslimeena wal muslimaat
Bismillaahi Allaahu Akbar  ×3
📖 हिंदी तर्जुमा
नियत: मैं नियत करता/करती हूँ कि इस जानवर को इस तरह ज़िबह करूँगा/करूँगी कि उससे बहता हुआ खून निकल जाए और उसका गोश्त तमाम मोमिन मर्दों, मोमिन औरतों, मुसलमान मर्दों और मुसलमान औरतों के लिए हलाल हो जाए।
ज़िबह के वक्त: अल्लाह के नाम से — अल्लाह सबसे बड़ा है  (3 बार)
📖 English Translation
Niyyat (Intention): I intend to slaughter this animal such that the flowing blood is released, and its meat becomes permissible (halal) for all believing men, believing women, Muslim men, and Muslim women.
At the time of slaughter: In the name of Allah — Allah is the Greatest  (3 times)
📖 اردو ترجمہ
نیت: میں نیت کرتا/کرتی ہوں کہ اس جانور کو اس طرح ذبح کروں گا/گی کہ اس سے بہنے والا خون نکل جائے اور اس کا گوشت تمام مومن مردوں، مومن عورتوں، مسلمان مردوں اور مسلمان عورتوں کے لیے حلال ہو جائے۔
ذبح کے وقت: اللہ کے نام سے — اللہ سب سے بڑا ہے  (3 مرتبہ)

यह दुआ पहले नियत पढ़ी जाती है — फिर जैसे ही गले पर छुरी चलाएं, बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर 3 बार पढ़ें। यही मुकम्मल और सही तरीका है जो इस्लाम ने बताया है।


ज़िबह क्या होता है और यह क्यों ज़रूरी है?

समझो, "ज़िबह" एक अरबी शब्द है जिसका मतलब है — किसी जानवर की गर्दन की नसें और सांस की नली को तेज़ चाकू से काटना, जिससे खून बाहर निकल जाए और जानवर का गोश्त पाक और हलाल हो जाए। इस्लाम में हलाल गोश्त खाने का एक पूरा तरीका बताया गया है और उसी तरीके का नाम "ज़िबह" है।

भारत में मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, लखनऊ जैसे शहरों में बड़े-बड़े हलाल मीट की दुकानें हैं जहाँ हर रोज़ हज़ारों मुर्गियां इसी तरीके से हलाल की जाती हैं। लेकिन जब आप घर पर खुद ज़िबह करते हैं तो दुआ और तरीका दोनों का ध्यान रखना आपकी ज़िम्मेदारी है।

📖

दुआ का स्रोत

क़ुरान और सुन्नत

⏱️

कब पढ़ें

चाकू चलाते वक्त

किस पर लागू

हर हलाल जानवर

🕌

हुक्म

फ़र्ज़ (अनिवार्य)


मुर्गी ज़िबह करने का सही तरीका — स्टेप बाय स्टेप

अब बात करते हैं कि मुर्गी को हलाल करने का सही इस्लामी तरीका क्या है। इसे ध्यान से पढ़ो और हर कदम पर अमल करो।

  • 1
    नियत करो: दिल में यह तय कर लो कि आप अल्लाह के लिए, उसके नाम पर इस मुर्गी को हलाल कर रहे हैं। नियत को ज़बान से बोलना ज़रूरी नहीं, दिल से काफी है।
  • 2
    वुज़ू या पाकी का ध्यान रखो: वुज़ू अनिवार्य नहीं है लेकिन पाकी (साफ-सफाई) की हालत में ज़िबह करना बेहतर है। आप चाहें तो ज़िबह से पहले वुज़ू कर लें।
  • 3
    तेज़ चाकू लो: चाकू बिल्कुल तेज़ और साफ होना चाहिए। जितना तेज़ चाकू होगा, जानवर को उतनी कम तकलीफ होगी। यह इस्लामी अदब का हिस्सा है।
  • 4
    मुर्गी का मुंह क़िबले की तरफ करो: जानवर को ज़िबह करते वक्त उसका मुंह क़िबले (मक्का) की दिशा में होना सुन्नत है।
  • 5
    बिस्मिल्लाह पढ़ो: जैसे ही चाकू चलाएं, بِسْمِ اللَّهِ اللهُ أَكْبَر पढ़ें। यह दुआ ज़िबह के वक्त, न पहले और न बाद में — बल्कि ठीक उसी लम्हे पढ़ी जानी चाहिए।
  • 6
    गर्दन की नसें पूरी तरह काटो: गर्दन की दोनों नसें (jugular veins), सांस की नली (trachea) और खाने की नली (esophagus) — ये चारों काटी जानी चाहिए। गर्दन की हड्डी न काटें।
  • 7
    खून बहने दो: ज़िबह के बाद मुर्गी को थोड़ी देर ऐसे ही रखें जब तक पूरा खून बाहर न निकल जाए। इसके बाद ही आगे का काम करें।

⚠️ ज़रूरी बात: ज़िबह करने के बाद मुर्गी के पूरी तरह शांत होने से पहले उसे गर्म पानी में न डालें। इससे गोश्त की हलालियत पर असर पड़ सकता है।


क्या दुआ भूल जाएं तो क्या होगा?

यह सवाल बहुत लोगों के मन में आता है। आलिमों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति जान-बूझकर बिस्मिल्लाह नहीं पढ़ता, तो वह ज़िबह हराम होगी। लेकिन अगर भूल से दुआ छूट जाए — तो कुछ आलिमों के मुताबिक वह ज़िबह माफ़ है और गोश्त हलाल रहेगा।

तो समझो — इरादे और जानकारी दोनों ज़रूरी हैं। हमेशा दुआ याद रखने की कोशिश करो और ज़िबह से पहले एक बार दोहरा लो।

📌 टिप: दुआ का एक कार्ड बना लो — بِسْمِ اللَّهِ اللهُ أَكْبَر — और रसोई में या जहाँ आप ज़िबह करते हों, वहाँ चिपका दो। इससे हमेशा याद रहेगी।


क्या औरतें मुर्गी ज़िबह कर सकती हैं?

जी हाँ! इस्लाम में औरतों को भी ज़िबह करने की पूरी इजाज़त है। अगर घर में कोई मर्द नहीं है और मुर्गी हलाल करनी है, तो औरत भी वही दुआ पढ़कर और वही तरीका अपनाकर मुर्गी को हलाल कर सकती है। शरीयत में इसकी कोई पाबंदी नहीं।

भारत के कई गाँवों में, जहाँ मर्द खेती या काम के लिए बाहर जाते हैं, वहाँ घर की औरतें ही यह काम करती हैं। यह पूरी तरह जायज़ और सही है।


मुर्गी ज़िबह से जुड़ी अहम बातें जो आप नहीं जानते

🐔 जानवर को तकलीफ मत दो

इस्लाम में जानवर के साथ रहम का हुक्म दिया गया है। ज़िबह से पहले मुर्गी को चाकू न दिखाओ। चाकू तेज़ रखो ताकि दर्द कम से कम हो। एक मुर्गी के सामने दूसरी को ज़िबह न करो।

💧 ज़िबह से पहले पानी पिलाओ

यह सुन्नत का हिस्सा है कि जानवर को ज़िबह से पहले पानी पिलाएं। इससे गोश्त भी बेहतर होता है और यह इंसानियत की निशानी भी है।

🔪 चाकू एक बार में खींचो

चाकू को रुक-रुककर नहीं बल्कि एक बार में तेज़ी से खींचना चाहिए। इससे जानवर को कम तकलीफ होती है और ज़िबह सही होता है।

🕌 क़िबले की दिशा का ध्यान रखो

भारत में क़िबला — यानी मक्का की दिशा — पश्चिम की तरफ है। मुर्गी का सिर इस दिशा में रखें।


बाज़ार से मुर्गी खरीदते वक्त क्या देखें?

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई — किसी भी शहर के बाज़ार में मुर्गी खरीदते वक्त हमेशा हलाल सर्टिफाइड दुकान से लें। आजकल कई बड़े ब्रांड जैसे Suguna, Venkateshwara Hatcheries आदि हलाल सर्टिफिकेट के साथ मुर्गी बेचते हैं।

अगर बाज़ार में खुद कटवाना हो तो दुकानदार से पूछो कि वह बिस्मिल्लाह पढ़कर ज़िबह करता है या नहीं। यह आपका हक़ है और यह सवाल पूछना बिल्कुल सही है।

💡 भारत में हलाल मुर्गी की कीमत: ब्रॉयलर मुर्गी आमतौर पर 180 से 350 रुपये प्रति किलो के बीच मिलती है (2026 के अनुसार)। देसी मुर्गी 400 से 600 रुपये प्रति किलो तक होती है।


मुर्गी ज़िबह करने की दुआ — एक नज़र में

नीचे दी गई टेबल आपको दुआ के दोनों हिस्से — नियत और ज़िबह — एक साथ दिखाती है। इसे स्क्रीनशॉट लेकर सेव कर सकते हैं।

हिस्सा
अरबी
Indo-Pak Roman
नियत
ज़िबह से पहले
نَوَيْتُ أَنْ أَذْبَحَ هٰذَا الْحَيَوَانَ...
Nawaitu an azbaha haazal haiwana be haisu yukhraju anhud-damul masfoohu...
ज़िबह दुआ
गला काटते वक्त ×3
بِسْمِ اللهِ اللهُ أَكْبَرُ
Bismillaahi Allaahu Akbar

संक्षेप में — ज़िबह की पूरी प्रक्रिया

देखो, पूरी बात को अगर एक नज़र में समझना हो तो यह रहा:

  • तेज़ और साफ चाकू तैयार करो
  • मुर्गी को क़िबले की तरफ लेटाओ
  • दिल में नियत करो
  • بِسْمِ اللَّهِ اللهُ أَكْبَر पढ़ते हुए गर्दन काटो
  • खून पूरी तरह बाहर निकलने दो
  • इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू करो

🤲 अल्लाह की रहमत हम सब पर हो

इस दुआ को अपने परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों तक ज़रूर पहुँचाएं — यह सदक़ा-ए-जारिया है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

मुर्गी ज़िबह करने की दुआ है — بِسْمِ اللَّهِ اللهُ أَكْبَر (बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर)। इसे ज़िबह करते वक्त — यानी जब चाकू चलाएं — उसी पल पढ़ना ज़रूरी है।

नहीं। इस्लामी शरीयत के मुताबिक जानबूझकर बिना अल्लाह का नाम लिए किया गया ज़िबह हराम है। हाँ, अगर भूल से दुआ छूट जाए तो कुछ आलिमों के मुताबिक वह माफ़ है। लेकिन कोशिश हमेशा करें।

हाँ बिल्कुल! इस्लाम में औरतों को ज़िबह करने की पूरी इजाज़त है। वही दुआ, वही तरीका — सब कुछ एक जैसा है। शरीयत में इसपर कोई पाबंदी नहीं।

वुज़ू अनिवार्य नहीं है, लेकिन पाकी की हालत में ज़िबह करना बेहतर है। अगर आपके पास वक्त हो तो वुज़ू कर लें — यह मुस्तहब (पसंदीदा) अमल है।

यह सुन्नत का हिस्सा है। जानवर को तकलीफ देने से इस्लाम मना करता है। ज़िबह से पहले पानी पिलाएं और उसे आराम से रखें। यह इस्लामी अदब है।

हाँ! بِسْمِ اللَّهِ اللهُ أَكْبَر — यह दुआ हर हलाल जानवर के ज़िबह में पढ़ी जाती है। चाहे मुर्गी हो, बकरा हो, भेड़ हो या ऊँट — दुआ एक ही है।

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