Bakrid 2026 Kab Hai? — 28 May, Namaz aur Qurbani ki Puri Jankari

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☪️ Islamic Festival 2026

बकरीद 2026 — पूरी जानकारी
हिंदी में

तारीख, नमाज़ का वक्त, कुर्बानी का तरीका, और इस्लाम में इसका क्या महत्व है — सब कुछ यहाँ जानिए।

📅 28 मई 2026 — गुरुवार
📅
तारीख
28 मई 2026
📆
दिन
गुरुवार
🌙
इस्लामी तारीख
10 ज़िल्हिज्जा
🏛️
छुट्टी
Gazetted Holiday

🕌 बकरीद 2026 — आखिर यह त्योहार है क्या?

देखो दोस्तों, अगर आप किसी मुस्लिम भाई-बहन से पूछें कि साल का सबसे बड़ा त्योहार कौन सा है, तो बहुत से लोग बकरीद का नाम लेंगे। और यकीन मानिए — इस जवाब के पीछे बहुत गहरी वजह है।

बकरीद को इस्लाम में ईद उल-अज़हा कहते हैं। अरबी भाषा में "Eid ul Adha" का मतलब होता है — कुर्बानी का त्योहार। यह त्योहार हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की उस महान कुर्बानी की याद में मनाया जाता है, जो उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे को कुर्बान करने की पेशकश करके दी थी। अल्लाह ने उनकी इस निष्ठा को कबूल करते हुए उनके बेटे की जगह एक जानवर भेज दिया।

📌 ध्यान रखें: बकरीद और ईद उल-फित्र — ये दोनों अलग-अलग त्योहार हैं। ईद उल-फित्र रमज़ान के रोज़ों के बाद मनाई जाती है, जबकि बकरीद हज के मौसम में कुर्बानी की याद में मनाई जाती है।

भारत में 20 करोड़ से ज़्यादा मुसलमान रहते हैं और बकरीद उनके लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि ईमान, त्याग, और भाईचारे का एक ज़िंदा सबक है।

📅 बकरीद 2026 में कब है? — सटीक तारीख

आपको सबसे पहले और सबसे ज़रूरी बात बता दें — बकरीद 2026 में 28 मई, गुरुवार को मनाई जाएगी।

🌙 इस्लामी कैलेंडर के अनुसार: यह दिन ज़िल्हिज्जा महीने की 10 तारीख होती है। ज़िल्हिज्जा इस्लामी वर्ष का 12वाँ और आखिरी महीना है। चाँद दिखने के बाद इस महीने की शुरुआत होती है और 10वें दिन बकरीद मनाई जाती है।

🗓️ 2026 का बकरीद कैलेंडर एक नज़र में

इस्लामी दिन अंग्रेज़ी तारीख (2026) क्या होता है?
1 ज़िल्हिज्जालगभग 19 मईज़िल्हिज्जा का आगाज़ (चाँद दिखने पर)
8 ज़िल्हिज्जा26 मईयौम-ए-तरवियाह (हाजी मिना पहुँचते हैं)
9 ज़िल्हिज्जा27 मईयौम-ए-अरफ़ाह (हज का सबसे अहम दिन)
10 ज़िल्हिज्जा28 मई 2026🎉 बकरीद / ईद उल-अज़हा
11 ज़िल्हिज्जा29 मईअय्याम-ए-तश्रीक (कुर्बानी जारी)
12 ज़िल्हिज्जा30 मईअय्याम-ए-तश्रीक (कुर्बानी जारी)
13 ज़िल्हिज्जा31 मईअय्याम-ए-तश्रीक (आखिरी दिन)

⚠️ नोट: ऊपर दी गई तारीखें चाँद दिखने पर निर्भर करती हैं। भारत में चाँद की रुयत (दर्शन) के बाद ही आधिकारिक तारीख तय होती है।

🕋 बकरीद की नमाज़ — वक्त और तरीका

बकरीद की नमाज़ — जिसे ईद की नमाज़ कहते हैं — इस दिन की सबसे पहली और सबसे ज़रूरी इबादत है। आइए समझते हैं कि यह नमाज़ कब और कैसे होती है।

⏰ नमाज़ का वक्त

बकरीद की नमाज़ सूरज निकलने के बाद, यानी सुबह लगभग 7 बजे से 9 बजे के बीच पढ़ी जाती है। अलग-अलग शहरों में वक्त थोड़ा अलग हो सकता है — इसलिए अपनी स्थानीय मस्जिद का नमाज़ का वक्त ज़रूर देखें।

🕌 नमाज़ कहाँ पढ़ी जाती है?

बकरीद की नमाज़ आमतौर पर ईदगाह (खुले मैदान) में पढ़ी जाती है। दिल्ली की जामा मस्जिद, मुंबई की नखोदा मस्जिद, हैदराबाद की मक्का मस्जिद — ये कुछ प्रसिद्ध जगहें हैं जहाँ लाखों लोग एक साथ नमाज़ अदा करते हैं।

  1. सुबह जल्दी उठें, गुस्ल (पूरे बदन का स्नान) करें।
  2. नए या साफ-सुथरे कपड़े पहनें — जितना हो सके अच्छे।
  3. इत्र (खुशबू) लगाएं — यह सुन्नत है।
  4. कुछ खाएं — ईद उल-फित्र के उलट, बकरीद पर पहले नमाज़ पढ़ें, फिर खाएं।
  5. ईदगाह या मस्जिद की तरफ चलते हुए तकबीर पढ़ें।
  6. ईद की 2 रकत नमाज़ अदा करें।
  7. इमाम का खुतबा (भाषण) सुनें।

🐑 कुर्बानी — असली मकसद और सही तरीका

दोस्तों, बकरीद का सबसे अहम हिस्सा है — कुर्बानी। लेकिन अफसोस की बात यह है कि बहुत से लोग इसका असली मकसद नहीं समझते।

📖 कुरान की बात: अल्लाह फरमाता है — "कुर्बानी का न गोश्त अल्लाह को पहुँचता है, न खून — बल्कि उसे तुम्हारी तकवा (ईश्वरभक्ति) पहुँचती है।" यानी कुर्बानी असल में दिल की भावना है।

🐐 कौन से जानवर की कुर्बानी होती है?

  • बकरा / बकरी — 1 व्यक्ति की तरफ से (कम से कम 1 साल का होना चाहिए)
  • भेड़ / दुम्बा — 1 व्यक्ति की तरफ से
  • गाय / बैल / भैंस — 7 लोगों की तरफ से (2 साल से ऊपर)
  • ऊँट — 7 लोगों की तरफ से (5 साल से ऊपर)

💰 2026 में कुर्बानी का खर्च — भारतीय कीमतें

जानवरअनुमानित कीमत (Rs.)कितने लोगों के लिए
छोटा बकराRs. 8,000 – 15,0001 व्यक्ति
अच्छा बकराRs. 20,000 – 50,0001 व्यक्ति
गाय / बैल (शेयर)Rs. 5,000 – 15,000 प्रति हिस्सा7 में से 1 हिस्सा
पूरी गायRs. 35,000 – 1,00,000+7 लोग
ऊँट (शेयर)Rs. 8,000 – 20,000 प्रति हिस्सा7 में से 1 हिस्सा

⚠️ ये कीमतें अनुमानित हैं और शहर, नस्ल और जानवर की उम्र के हिसाब से बदल सकती हैं।

🥩 गोश्त का बँटवारा — इस्लामी नियम

  • 1/3 हिस्सा — अपने घर और परिवार के लिए
  • 1/3 हिस्सा — रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए
  • 1/3 हिस्सा — ग़रीबों, मोहताजों और ज़रूरतमंदों के लिए
💚 यही वह बात है जो बकरीद को सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि एक सामाजिक समानता का त्योहार बनाती है। जो लोग पूरे साल मांस नहीं खा सकते, उन्हें भी इस दिन उनका हक मिलता है।

🌙 ज़िल्हिज्जा के पहले 10 दिन — बेहद खास

आपको यह जानकर खुशी होगी कि बकरीद से पहले के 10 दिन — यानी ज़िल्हिज्जा के पहले 10 दिन — इस्लाम में पूरे साल के सबसे पवित्र दिन माने जाते हैं।

दिन 1–8 (लगभग 19–26 मई 2026)
ज़िल्हिज्जा का आगाज़
इन दिनों ज़्यादा से ज़्यादा नमाज़, ज़िक्र, तस्बीह, तिलावत और सदका करने का हुक्म है।
9 ज़िल्हिज्जा — 27 मई 2026
यौम-ए-अरफ़ाह (Day of Arafah)
यह साल का सबसे पवित्र दिन है। जो हाजी नहीं हैं, उनके लिए इस दिन रोज़ा रखना बेहद फ़ज़ीलत वाला है। इस दिन का रोज़ा दो साल के गुनाहों की माफ़ी का ज़रिया बनता है।
10 ज़िल्हिज्जा — 28 मई 2026
🎉 ईद उल-अज़हा / बकरीद
नमाज़, कुर्बानी, खुशियाँ, मिलना-जुलना और ग़रीबों की मदद।
11, 12, 13 ज़िल्हिज्जा
अय्याम-ए-तश्रीक
इन 3 दिनों में भी कुर्बानी की जा सकती है। हर नमाज़ के बाद तकबीर-ए-तश्रीक पढ़ना वाजिब है।

🕋 बकरीद और हज — क्या रिश्ता है?

देखो, बकरीद और हज एक-दूसरे से बहुत गहराई से जुड़े हैं। जब दुनिया के कोने-कोने से लाखों मुसलमान मक्का मुकर्रमा (सऊदी अरब) में इकट्ठा होते हैं और हज का फर्ज़ अदा करते हैं — ठीक उसी वक्त बाकी दुनिया के मुसलमान घर पर बैठकर उनके साथ कुर्बानी करके इस पाक मौके में शरीक होते हैं।

  • हज इस्लाम के 5 बुनियादी स्तंभों में से एक है।
  • हज सिर्फ उन लोगों पर फर्ज़ है जो शारीरिक और आर्थिक रूप से सक्षम हों।
  • भारत से हर साल लगभग 1,75,000+ हाजी हज के लिए जाते हैं।
  • 2026 में हज की तारीखें भी मई के अंत में ही हैं।
  • यौम-ए-अरफ़ाह (27 मई) पर अरफ़ात के मैदान में हाजियों का जमावड़ा होता है।

🎉 बकरीद कैसे मनाएं — पूरा दिन का प्लान

अगर आप सोच रहे हैं कि बकरीद का दिन कैसे गुज़ारें, तो यह रहा एक आदर्श प्लान:

  1. सुबह जल्दी उठें — फज्र की नमाज़ पढ़ें और दिन की शुरुआत अल्लाह की याद से करें।
  2. गुस्ल करें और नए कपड़े पहनें — इत्र लगाएं, परिवार के साथ तैयार हों।
  3. तकबीर पढ़ते हुए ईदगाह जाएं — "अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह..."
  4. ईद की नमाज़ अदा करें — इमाम के साथ 2 रकत नमाज़ और खुतबा सुनें।
  5. "ईद मुबारक" कहें — सबसे गले मिलें, खुशियाँ बाँटें।
  6. कुर्बानी करें — नमाज़ के बाद कुर्बानी करें या किसी भरोसेमंद जगह से करवाएं।
  7. गोश्त बाँटें — ग़रीबों और पड़ोसियों को उनका हिस्सा पहुँचाएं।
  8. परिवार के साथ खाना खाएं — बिरयानी, कोरमा, सेवईं, शीर खुर्मा...
  9. रिश्तेदारों के यहाँ जाएं — बड़ों का आदर करें, बच्चों को ईदी दें।

🍛 बकरीद के खास पकवान — भारतीय रसोई का जादू

बकरीद का जश्न बिना लज़ीज़ खाने के अधूरा है। भारत में इस दिन जो पकवान बनते हैं, वो मुँह में पानी ला देते हैं।

  • मटन बिरयानी — दम पर पकाई हुई, केसर-इलायची की खुशबू से भरपूर। दिल्ली, लखनऊ और हैदराबाद की बिरयानी देश भर में मशहूर है।
  • शीर खुर्मा — दूध, खजूर और सेवईं से बनी यह मिठाई हर ईद का खास हिस्सा है।
  • मटन कोरमा — मसालेदार करी जो चावल या नान के साथ खाई जाती है।
  • सेवईं की खीर — घर-घर में बनती है और मेहमानों को सबसे पहले यही परोसी जाती है।
  • कबाब और टिक्का — बकरे के ताज़े गोश्त के कबाब — शामी, गलावटी, बोटी।
  • हलीम — गेहूँ और मांस से बना यह पकवान हैदराबाद में खासतौर पर मशहूर है।
  • मुतंजन / ज़र्दा — मीठे चावल जो कुछ घरों में पारंपरिक रूप से बनाए जाते हैं।

🏛️ बकरीद पर सरकारी छुट्टी और बाज़ार

भारत में बकरीद एक Gazetted Holiday है। इसका मतलब है कि इस दिन:

  • सभी सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे।
  • बैंक बंद रहेंगे — लेकिन ATM काम करेंगे।
  • स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे।
  • बड़े बाज़ार और मॉल खुले रह सकते हैं।
  • मुस्लिम इलाकों में दुकानें बंद रहेंगी, लेकिन शाम को खुलती हैं।
💡 ज़रूरी बात: अगर आप 28 मई 2026 को किसी सरकारी काम के लिए जाने की सोच रहे हैं — तो पहले से plan करें। इस दिन बैंक और सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

नीचे दिए गए सवालों पर click करें और जवाब पाएं।

बकरीद 2026 में कितनी तारीख को है? +
बकरीद 2026 में 28 मई, गुरुवार को मनाई जाएगी। यह इस्लामी कैलेंडर के अनुसार 10 ज़िल्हिज्जा का दिन है।
बकरीद को ईद उल-अज़हा क्यों कहते हैं? +
"ईद उल-अज़हा" अरबी शब्द है जिसका मतलब है कुर्बानी का त्योहार। यह हज़रत इब्राहीम (अ.स.) की अल्लाह के प्रति निष्ठा और कुर्बानी की याद में मनाया जाता है।
कुर्बानी कैसे की जाती है और गोश्त कैसे बाँटें? +
कुर्बानी में बकरा, गाय, ऊँट या भेड़ जिबह की जाती है। गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बाँटें — एक हिस्सा अपने परिवार के लिए, एक हिस्सा रिश्तेदारों के लिए, और एक हिस्सा ग़रीबों के लिए।
बकरीद की नमाज़ का वक्त क्या है? +
बकरीद की नमाज़ सूरज निकलने के बाद यानी सुबह 7 बजे से 9 बजे के बीच पढ़ी जाती है। यह ईदगाह या मस्जिद में होती है। सटीक वक्त अपनी स्थानीय मस्जिद से लें।
यौम-ए-अरफ़ाह कब है और इसका रोज़ा क्यों रखें? +
यौम-ए-अरफ़ाह 27 मई 2026 (9 ज़िल्हिज्जा) को है। यह साल का सबसे पवित्र दिन है। इस दिन का रोज़ा दो साल के गुनाहों — एक पिछले साल का और एक आने वाले साल का — की माफ़ी का ज़रिया बनता है।
क्या बकरीद पर सरकारी छुट्टी होती है? +
हाँ! बकरीद भारत में एक Gazetted Holiday है। इस दिन सरकारी दफ्तर, बैंक और स्कूल बंद रहते हैं।
बकरीद और ईद उल-फित्र में क्या फर्क है? +
ईद उल-फित्र रमज़ान के 30 रोज़ों के बाद आती है और इसे "मीठी ईद" भी कहते हैं। जबकि बकरीद (ईद उल-अज़हा) हज के मौसम में आती है और इसमें कुर्बानी होती है — इसे "बड़ी ईद" भी कहते हैं।
2026 में बकरीद के लिए बकरे की कीमत कितनी होगी? +
2026 में भारत में एक सामान्य बकरे की कीमत लगभग Rs. 8,000 से Rs. 50,000 तक हो सकती है — नस्ल, उम्र, वज़न और शहर के हिसाब से। बड़े शहरों में कीमत थोड़ी ज़्यादा होती है।

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