Bakrid Ki Namaz Ka Tarika 2026 – Imam Ke Piche 2 Rakat Kaise Padhe | Poori Guide Hindi Mein

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🕌 बकरीद 2026 | ईद-उल-अज़हा

इमाम के पीछे बकरीद की नमाज़ कैसे पढ़ें?
2026 का सबसे आसान और मुकम्मल तरीका

📅 बकरीद 2026 — भारत में 28 मई 2026 (गुरुवार) को मनाई जाएगी

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ज़रूरी सूचना 2026: इस साल भारत में बकरीद 28 मई 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। चाँद के दीदार के बाद यह तारीख़ सरकार ने आधिकारिक रूप से कन्फ़र्म कर दी है। कश्मीर में यह 27 मई को भी मनाई जा सकती है। नमाज़ सुबह जल्दी — आमतौर पर 7 बजे से 9 बजे के बीच — अदा की जाती है।

देखो भाई, बकरीद यानी ईद-उल-अज़हा — यह इस्लाम का सबसे बड़ा और पाक त्योहार है। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की कुर्बानी की याद में हर साल यह मनाया जाता है। इस दिन की सबसे पहली और सबसे ज़रूरी इबादत है — ईद की नमाज़। लेकिन बहुत सारे लोग — खास तौर पर नौजवान या जो नए नए नमाज़ पढ़ना सीख रहे हैं — उन्हें यह समझ नहीं आता कि इमाम के पीछे यह नमाज़ कैसे पढ़ते हैं।

तो आज हम आपको बताएँगे — बिल्कुल आसान ज़बान में, एक दोस्त की तरह — कि इमाम के पीछे बकरीद की नमाज़ कैसे अदा की जाती है। हर क़दम समझो, हर तकबीर जानो, और इस साल 2026 में अपनी नमाज़ पूरे इत्मीनान से अदा करो।


बकरीद की नमाज़ क्या होती है?

बकरीद की नमाज़ को "सलात-उल-ईद" या "ईद-उल-अज़हा की नमाज़" कहते हैं। यह एक खास नमाज़ है जो साल में सिर्फ एक बार — ईद-उल-अज़हा के दिन — पढ़ी जाती है।

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कहाँ पढ़ी जाती है?

मस्जिद, ईदगाह या खुले मैदान में — जमात के साथ

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कब पढ़ी जाती है?

सूरज उगने के 15-20 मिनट बाद से लेकर ज़वाल से पहले तक

📿

कितनी रकात?

2 रकात — लेकिन 6 ज़्यादा तकबीरों के साथ (जो आम नमाज़ से अलग है)

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कैसे पढ़ी जाती है?

इमाम के पीछे जमात के साथ — अकेले नहीं पढ़ी जाती

💡 समझो: ईद की नमाज़ में कुल 12 ज़ाइद (अतिरिक्त) तकबीरें होती हैं — पहली रकात में 7 और दूसरी रकात में 5। यही इसे आम नमाज़ से अलग बनाता है।


नमाज़ से पहले की तैयारी — ये काम ज़रूर करो

भाई, नमाज़ से पहले की तैयारी उतनी ही ज़रूरी है जितनी नमाज़ खुद। नबी करीम ﷺ की सुन्नत है कि ईद के दिन खास तौर पर तैयार होकर निकलें। देखो क्या-क्या करना चाहिए:

  • गुस्ल (पूरे बदन का स्नान) करो — ईद के दिन गुस्ल करना सुन्नत है
  • नए या साफ कपड़े पहनो — जो सबसे अच्छा हो
  • इत्र लगाओ — बिना अल्कोहल वाला
  • कुर्बानी से पहले कुछ मत खाओ — बकरीद पर यह मुस्तहब है कि कुर्बानी के बाद ही खाना खाएँ
  • ईदगाह जाते हुए तकबीर पढ़ते जाओ — "अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह..."
  • एक रास्ते से जाओ और दूसरे से वापस आओ — सुन्नत है
  • जल्दी पहुँचो — अगली सफ में जगह पाने के लिए और सुकून से नमाज़ पढ़ने के लिए

नियत (इरादा) कैसे करें?

नियत दिल का इरादा होती है — ज़बान से कहना ज़रूरी नहीं लेकिन कह सकते हैं। नमाज़ से पहले दिल में यह इरादा करो कि:

📖 नियत की इबारत (अरबी)
نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ لِلَّهِ تَعَالَى رَكْعَتَيْ صَلَاةِ عِيدِ الْأَضْحَى مَعَ سِتِّ تَكْبِيرَاتٍ وَاجِبٍ
हिंदी में: "मैं नियत करता/करती हूँ दो रकात नमाज़ ईद-उल-अज़हा की, छह ज़ाइद तकबीरों के साथ, अल्लाह के लिए, इमाम के पीछे।"

💡 आसान बात: बस दिल में यह सोचो — "मैं इमाम के पीछे बकरीद की दो रकात नमाज़ अदा कर रहा हूँ।" बस यही काफी है!


इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ने का पूरा तरीका — एक-एक क़दम

अब सबसे ज़रूरी हिस्सा आता है। ध्यान से समझो — यह नमाज़ 2 रकात की होती है, लेकिन इसमें 6 ज़ाइद (extra) तकबीरें होती हैं। नीचे हर क़दम बिल्कुल आसान तरीके से बताया गया है:

🟢 पहली रकात

1

तहरीमा की तकबीर (नमाज़ शुरू करना)

इमाम "अल्लाहु अकबर" कहेगा — आप भी उसी वक्त हाथ उठाकर "अल्लाहु अकबर" कहो। हाथ कानों तक उठाओ। यह तकबीर-ए-तहरीमा है — इससे नमाज़ शुरू होती है। अब हाथ बाँध लो।

2

सना पढ़ो (दिल में)

हाथ बाँधने के बाद चुपचाप "सुब्हानकल्लाहुम्मा व बिहम्दिका..." पढ़ो। यह सिर्फ पहली रकात की शुरुआत में पढ़ा जाता है।

3

3 ज़ाइद तकबीरें (हनफ़ी तरीके से)

इमाम 3 बार "अल्लाहु अकबर" कहेगा — आप भी हर बार हाथ उठाकर कहो। पहली 2 तकबीरों के बाद हाथ छोड़ दो (साइड में), तीसरी तकबीर के बाद हाथ बाँध लो।

4

सूरह फ़ातिहा और दूसरी सूरह

इमाम जोर से सूरह फ़ातिहा और फिर कोई और सूरह पढ़ेगा — जैसे सूरह अल-अ'ला। आप सुनो, कुछ नहीं पढ़ना — बस ध्यान से सुनो।

5

रुकू करो

इमाम के साथ झुको (रुकू करो)। "सुब्हाना रब्बियल अज़ीम" 3 बार पढ़ो। फिर इमाम के साथ खड़े हो जाओ। "समिअल्लाहु लिमन हमिदह, रब्बना लकल हम्द" पढ़ो।

6

सजदा करो

इमाम के साथ 2 सजदे करो। हर सजदे में "सुब्हाना रब्बियल अ'ला" 3 बार पढ़ो। दोनों सजदों के बीच थोड़ी देर बैठो।

🔵 दूसरी रकात

7

दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाओ

पहली रकात के दोनों सजदों के बाद इमाम के साथ खड़े हो जाओ। अब चुपचाप सुनो।

8

सूरह फ़ातिहा और दूसरी सूरह

इमाम पहले सूरह फ़ातिहा और फिर कोई सूरह पढ़ेगा — जैसे सूरह अल-ग़ाशिया। आप बस सुनो।

9

3 ज़ाइद तकबीरें (रुकू से पहले)

क़िरात (सूरह पढ़ने) के बाद इमाम 3 बार "अल्लाहु अकबर" कहेगा — आप भी हर बार हाथ उठाकर कहो। तीनों तकबीरों के बाद हाथ छोड़ दो।

10

चौथी तकबीर के साथ रुकू

तीन तकबीरों के बाद इमाम चौथी बार "अल्लाहु अकबर" कहते हुए रुकू में जाएगा — आप भी उसी के साथ रुकू में जाओ।

11

2 सजदे करो

इमाम के साथ रुकू से उठो, फिर 2 सजदे करो। हर सजदे में "सुब्हाना रब्बियल अ'ला" 3 बार।

12

अत्तहियात और सलाम

दूसरे सजदे के बाद बैठो। अत्तहियात, दुरूद इब्राहीम और दुआ-ए-मासूरा पढ़ो। फिर इमाम के साथ दाईं और बाईं तरफ सलाम फेरो: "अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह"

اللَّهُ أَكْبَرُ
Allahu Akbar
🌙 अल्लाह सबसे बड़ा है — यह तकबीर नमाज़ की जान है

📊 दोनों रकातों का एक नज़र में खाका

क़दम पहली रकात दूसरी रकात
शुरुआत तहरीमा की तकबीर + सना खड़े होना
ज़ाइद तकबीरें 3 तकबीरें (क़िरात से पहले) 3 तकबीरें (रुकू से पहले)
क़िरात सूरह फ़ातिहा + सूरह अल-अ'ला सूरह फ़ातिहा + सूरह अल-ग़ाशिया
रुकू क़िरात के बाद 3 तकबीरों के बाद (4वीं तकबीर पर)
सजदा 2 सजदे 2 सजदे
आखिर में अत्तहियात + दुरूद + सलाम

⚠️ ध्यान दो: हनफ़ी मसलक में पहली रकात में 3 ज़ाइद तकबीरें हैं और दूसरी रकात में भी 3 ज़ाइद तकबीरें हैं (कुल 6 ज़ाइद)। शाफ़ेई मसलक में यह 7+5 = 12 होती हैं। भारत में अधिकतर लोग हनफ़ी हैं — अपने इमाम के तरीके को फ़ॉलो करो।


🎤 खुत्बा — नमाज़ के बाद का अहम हिस्सा

नमाज़ पूरी होने के बाद इमाम खुत्बा देगा। यह बकरीद की खास बात है — ईद की नमाज़ में खुत्बा नमाज़ के बाद होता है (जुमे के उलट, जहाँ खुत्बा पहले होता है)।

  • नमाज़ खत्म होने पर उठो नहीं — बैठे रहो और खुत्बा सुनो
  • खुत्बा सुनना सुन्नत है — इसे छोड़कर जाना ठीक नहीं
  • खुत्बे में कुर्बानी, हज और इस्लामी तालीम की बातें होती हैं
  • खुत्बे के बाद इमाम दुआ करेगा — आमीन कहो
  • खुत्बा खत्म होने के बाद एक दूसरे को ईद मुबारक कहो और गले मिलो

❌ आम गलतियाँ जो लोग करते हैं — इनसे बचो!

तकबीर के वक्त हाथ न उठाना

बहुत से लोग ज़ाइद तकबीरों में हाथ नहीं उठाते। हर तकबीर के साथ हाथ कानों तक उठाना ज़रूरी है।

इमाम से पहले रुकू या सजदे में जाना

इमाम के बाद जाओ — पहले नहीं। यह नमाज़ में बहुत बड़ी गलती है।

खुत्बे के दौरान बात करना

खुत्बा सुनते वक्त बात करना सख्त मना है — ध्यान से सुनो।

नमाज़ के बाद तुरंत उठ जाना

नमाज़ के बाद खुत्बे से पहले उठकर जाना सुन्नत के खिलाफ है।

देर से आना और पहली तकबीर छोड़ना

कोशिश करो कि तकबीर-ए-ऊला (पहली तकबीर) न छूटे — जल्दी पहुँचो।

मोबाइल फोन चालू रखना

नमाज़ से पहले फोन silent या switch off कर दो — यह अदब का तकाज़ा है।


⏰ अगर आप देर से आए — तो क्या करें?

यार, कभी-कभी ट्रैफिक या किसी वजह से देर हो जाती है। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में ईद के दिन सड़कें भरी होती हैं। तो अगर नमाज़ शुरू हो गई है और आप बाद में पहुँचे — तो क्या करें?

A

इमाम किसी भी हालत में हो — जुड़ जाओ

अगर इमाम रुकू में है, क़ियाम में है — जहाँ भी हो, नियत करके जुड़ जाओ। बाद में जो छूटा उसे पूरा करोगे।

B

अगर एक पूरी रकात छूट गई

इमाम के सलाम फेरने के बाद उठो और जो रकात छूटी वह अदा करो। उस रकात में तुम खुद तकबीरें कहोगे।

C

अगर पूरी नमाज़ ही छूट गई

ईद की नमाज़ की क़जा नहीं होती। लेकिन कुछ उलेमा कहते हैं कि 4 रकात नफ़्ल पढ़ लो। अपने मसलक के आलिम से पूछो।


🤲 नमाज़ के बाद की दुआ और सुन्नतें

भाई, नमाज़ के बाद का वक्त बहुत क़ीमती होता है। खुत्बे के बाद इमाम दुआ करेगा। इस वक्त दिल से आमीन कहो। उसके बाद:

  • अपने घरवालों, दोस्तों, पड़ोसियों को "ईद मुबारक" कहो
  • गले मिलो — 3 बार (यह सुन्नत है)
  • कुर्बानी के लिए निकलो — जो कुर्बानी दे सकते हों
  • गरीबों और ज़रूरतमंदों को कुर्बानी का गोश्त ज़रूर भेजो
  • कब्रिस्तान जाकर मरहूम रिश्तेदारों के लिए दुआ करो
تَقَبَّلَ اللَّهُ مِنَّا وَمِنكُم
Taqabbalallahu minna wa minkum
🌙 मतलब: अल्लाह हमारी और आपकी (इबादत) कुबूल फ़रमाए — यह ईद मुबारक कहने का इस्लामी तरीका है

🐐 कुर्बानी — बकरीद का दिल

नमाज़ के बाद बकरीद का सबसे बड़ा अमल है — कुर्बानी। जो लोग साहिब-ए-निसाब हैं (यानी जिनके पास ज़कात के निसाब जितना माल है) उन पर कुर्बानी करना वाजिब है।

🐐

बकरा / बकरी

1 जानवर = 1 शख्स की कुर्बानी। क़ीमत: लगभग Rs. 8,000 – Rs. 25,000 (2026 में)

🐄

गाय / भैंस

1 जानवर = 7 लोगों की कुर्बानी। क़ीमत: लगभग Rs. 35,000 – Rs. 80,000

🐪

ऊँट

1 ऊँट = 7 लोगों की कुर्बानी। आमतौर पर बड़े शहरों में मिलता है।

🍖

गोश्त का बँटवारा

3 हिस्से: 1/3 खुद के लिए, 1/3 रिश्तेदार, 1/3 ग़रीब और मोहताज के लिए


❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

भारत में बकरीद 2026, 28 मई को मनाई जाएगी। ईद की नमाज़ का वक्त आमतौर पर सुबह सूरज उगने के 15-20 मिनट बाद शुरू होता है और दोपहर से पहले खत्म हो जाता है। दिल्ली में यह लगभग 7:00 – 9:30 बजे के बीच होती है। मुंबई, हैदराबाद, लखनऊ में थोड़ा वक्त अलग हो सकता है — अपनी स्थानीय मस्जिद से पूछ लें।
जी हाँ, औरतें भी ईद की नमाज़ पढ़ सकती हैं। बल्कि नबी करीम ﷺ ने औरतों को भी ईदगाह जाने का हुक्म दिया था — यहाँ तक कि बुज़ुर्ग और हायज़ा (जो नमाज़ न पढ़ सकें) औरतें भी माहौल में शामिल हों और दुआ करें। तरीका बिल्कुल वही है — बस पर्दे का खयाल रखो।
हनफ़ी मसलक में ज़ाइद तकबीरें: पहली रकात में 3 (क़िरात से पहले) + दूसरी रकात में 3 (रुकू से पहले) = कुल 6 ज़ाइद तकबीरें। शाफ़ेई मसलक में: पहली रकात में 7 + दूसरी रकात में 5 = कुल 12 ज़ाइद तकबीरें। भारत के अधिकतर हिस्सों में हनफ़ी मसलक पर अमल होता है। अपने इमाम का तरीका फ़ॉलो करो।
ईद की नमाज़ जमात के साथ पढ़ी जाती है और यही सुन्नत है। हनफ़ी मसलक के मुताबिक़ अकेले ईद की नमाज़ नहीं होती — कम से कम 3 लोगों की जमात ज़रूरी है। लेकिन अगर किसी वजह से (बीमारी, COVID जैसे हालात आदि) जमात में जाना ना हो सके, तो उलेमा-ए-कराम से राय लें।
ईद-उल-फ़ित्र (रमज़ान की ईद) में नमाज़ से पहले कुछ मीठा खाना सुन्नत है — जैसे खजूर। लेकिन ईद-उल-अज़हा (बकरीद) में मुस्तहब यह है कि नमाज़ से पहले कुछ न खाएँ — पहले कुर्बानी करें, फिर उसके गोश्त से खाएँ। यह नबी करीम ﷺ की सुन्नत है।
नबी करीम ﷺ की सुन्नत ईदगाह (खुला मैदान) में नमाज़ पढ़ने की है। लेकिन अगर बारिश हो, जगह कम हो, या कोई मजबूरी हो — तो मस्जिद में भी नमाज़ हो सकती है। आज भारत के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, हैदराबाद में दोनों जगह नमाज़ होती है।
बड़ी जमात में माइक की ज़रूरत होती है — आजकल हर ईदगाह में माइक होता है। अगर फिर भी आवाज़ न आए तो अगल-बगल के लोगों की हरकत देखो और उनके साथ मिलकर चलते रहो। इमाम के पीछे आप मुक़्तदी हैं — इमाम की हर हरकत के बाद आप चलते हैं।

🌙 अल्लाह आपकी नमाज़ कुबूल फ़रमाए!

देखो भाई, बकरीद की नमाज़ कोई मुश्किल चीज़ नहीं है। बस ध्यान से इमाम की पैरवी करो, हर तकबीर पर हाथ उठाओ, और दिल से अल्लाह की इबादत करो। यह नमाज़ साल में सिर्फ एक बार आती है — इसे पूरे खुशू-खुज़ू के साथ अदा करो। ईद मुबारक!

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